शेयर बाजार में सर्किट  

क्या है सर्किट

जब शेयर बाजार एक तय सीमा से ज्यादा कम हो जाता है या बढ़ जाने पर बाजार में आये इस उतार-चढ़ाव को रोकने या नियंत्रित करने के लिए के सर्किट लगाया जाता है। यह सर्किट बाजार की नियामक संस्था सेबी द्वारा निवेशको के हितो की रक्षा द्वारा लगाया जाता है |

सर्किट के प्रकार

सर्किट दो तरह के होते है | एक अपर सर्किट एवं दूसरा लोवर सर्किट | मार्किट के एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाने पर अपर सर्किट और कम हो जाने पर लोवर सर्किट लगाया जाता है |

सर्किट की सीमा

सेबी ने दोनों प्रकार की सर्किट ब्रेकर के लिए 3 स्तर 10%, 15% और 20%  निर्धारित किये है | अथार्त बाजार के 10%, 15% और 20% घटने-बढ़ने पर सर्किट लगाये जाते है |

अगर बाजार (निफ्टी) 10% अंक ऊपर या नीचे जाता है तो पहला सर्किट ब्रेकर, 15% अंक ऊपर या नीचे जाने पर दूसरा सर्किट ब्रेकर लग जाता है, लेकिन अगर बाजार (निफ्टी) 20 फीसदी अंक ऊपर या नीचे होता है तो तीसरे सर्किट ब्रेकर  के तहत ट्रेडिंग को उस कारोबारी दिवस के बाकी समय के लिए रोक दिया जाता है |

अपर सर्किट और लोअर सर्किट का इतिहास

देश के शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर का इतिहास इस प्रकार रहा है –

क्रम दिनांक अपर सर्किट / लोअर सर्किट
पहली बार 17 मई 2004 लोअर सर्किट  (दो बार)
दूसरी बार 22 मई 2006 लोअर सर्किट
तीसरी बार 17 अक्टूबर 2007 लोअर सर्किट
चोथी बार 21 जनवरी 2008 लोअर सर्किट
पांचवी बार 18 मई 2009 अपर सर्किट  (दो बार)
छठी बार 13 मार्च, 2020 लोअर सर्किट

 

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