क्यों निकली बाजार के उड़ते हुए गुब्बारे की हवा…!

 

 इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में जो हुआ उसकी उम्मीद शायद ही किसी को थी | निवेशको ने 2008 के बाद एक सप्ताह की सबसे बड़ी  तेज गिरावट देखी | इस गिरावट के चलते निवेशको के लाखो  करोड़ रुपये स्वाहा हो गए | आगे कोई नही जानता कि यह गिरावट अभी कितनी और बाकी है ? और संसेक्स और निफ्टी कहां जाकर रुकेगें ? वास्तव में देखा जाये तो यह गिरावट एक दिन का परिणाम नही होकर पिछले कई महीनों का परिणाम है | कच्चे तेल की कीमतों में ऊबाल, रुपये का धरासाई होना, अमेरिका और चीन के बीच जारी टेरिफ वॉर, अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध और तेजी से पनप रहे चालू खाते के घाटे ने बाजार की हालत पतली की है | बाजार की मंदी से मचे शेयरों के कत्लेआम से निवेशक अनजान नहीं थे |

               अब तक कहा जा रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में होने के साथ तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था भी है | भारतीय रुपया दुनिया में काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। चालू खाते के घाटा पूरी नियन्त्रण में है | यह भी कहा जाता रहा है कि देश किसी भी तरह की आर्थिक समस्याओं से निपटने में सक्षम है | आम निवेशक को  भरोसा दिलाया जाता रहा है कि शेयर बाजार ही उनका पैसा सुरक्षित रखने की एकमात्र सही जगह होने के साथ-साथ उनकी कमाई दोगुनी-चौगुनी भी हो सकती है | निवेशको को मुचुअल फण्ड में आकर्षक आय के सपने दिखाए गये,क्योंकि इस गिरावट से पहले तक बाजार ऊपर की ही तरफ भागते हुये नित नयी ऊंचाईयों के कीर्तिमान बना रहा था ।

              फिर अचानक क्या हुआ कि, आसमान में उड़ते हुए गुब्बारे की हवा कैसे निकलने लग गयी ? क्या इसमें अधिक हवा भर जाना कारण तो नही ? आख़िरकार अधिक हवा भर जाने से गुब्बारा फूटता ही है ? क्या कच्चे तेल की कीमतों ऊबाल, रुपये का धरासाई होना, अमेरिका और चीन के बीच जारी टेरिफ वॉर, अमेरिका का ईरान पर प्रतिबंध और बढ़ता चालू खाते के घाटे से अलग भी कोई कारण है बाजार के धराशाई होने का जिसे निवेशक जानकर भी शतुरमुर्ग की तरह अनजान बना रहा ?

               सेंसेक्स के दिनांक 29 अगस्त 2018 को 38989.65 का आंकड़ा और निफ्टी के दिनांक 28 अगस्त 2018 को 11760.20 ऊंचाईयों का कीर्तिमान बनाना साफ जाहिर करता है कि बाजार पूरी तरह तेजड़ियों की गिरफ्त में था | अब एक बार फिर बाजार को मंदड़ियों ने जकड़ लिया है | बाजार में एक कहावत है कि “तेजड़िए भी पैसा बनाते हैं, और मंदड़िए भी, लेकिन मारे जाते है बेचारे छोटे निवेशक” । बाजार में गिरावट का कोई भी कारण हो पर यह चिंताजनक है | बाजार में गिरावट की एक सच्चाई यह भी है कि P/E RATIO यानी प्रति शेयर लाभ और P/B RATIO यानी प्रति लेखा कीमत ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जिसका कोई ठोस कारण स्पष्ट नहीं है।  

         दिनांक 28 अगस्त 2018 को निफ्टी ने 11760.20 ऊंचाईयों का कीर्तिमान बनाने के दिन निफ्टी का P/E RATIO 28.66 पर और  P/B RATIO 3.82 पर था, जो वर्तमान में 05 अक्टूबर 2018 को निफ्टी P/E RATIO 24.95 और  P/B RATIO 3.28 पर है | मतलब साफ है कि बाजार में  शेयरों की कीमते अपनी असली कीमत से कहीं ज्यादा हो चुकी थी । यह भी सम्भावना है कि निफ्टी में शेयरों की कीमतें बढने का आधार अन्य कोई मजबूत कारण नही होकर सिर्फ सट्टेबाज़ी था | अधिक जानकारी के यह  टेबल देखे :-

दिनांक P/E RATIO P/B RATIO NIFTY
08-01-2008 28.29 6.53 6179
12-02-2008 20.64 5.07 4838
15-07-2008 16.53 3.66 3861
13-10-2010 25.91 3.92 6233
10-11-2016 22.70 3.23 8525
23-01-2018 27.81 3.74 11083
23-03-2018 24.38 3.38 9998
28-08-2018 28.66 3.82 11760
05-10-2018 24.95 3.28 10316

 

 

घबराने की जरूरत नहीं

 

अगर निवेश मजबूत फंडामेंटल वाली कम्पनियों के शेयरों में है तो निवेशको को बाजार की वर्तमान मंदी से घबराने की जरूरत नहीं है | कितनी भी गिरावट आये लेकिन निफ्टी/संसेक्स को तो ऊपर ही जाना होता है | बाजार में कभी भी तेज़ी स्थायी नही रहती है तो मंदी कैसे स्थायी रह सकती है | किसी भी देश का आर्थिक विकास शेयर बाजार नहीं करते अपितु आर्थिक विकास बेहतर हो तो शेयर बाजार पर उसका असर दिखता है | वर्तमान में बाजार ओसत P/E RATIO के करीब आ गया है | बाजार में गिरावट का दौर जल्दी ही समाप्त होने की सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता है |

 

 

 

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