अब यह सम्भावना नजर आ रही है कि बाजार से नकारात्मक बाते दूर होती जा रही है,जिनके कारण बाजार लगातार गिर रहा था | बाजार के फिर से तेजी की ओर बढने की सम्भावनाये प्रबल हो गयी है | IF&SL के कारण देश में छाये मंदी के खतरे के बादल अब छंटते नजर आ रहे है | इसकी एक झलक सोमवार के बाजार ने दिखलाई और बाजार ने दिन के न्यूनतम स्तर से जबर्दस्त सुधार किया और तीन दिनों से चली आ रही गिरावट को रोक दिया |

              किसके के कारण बाजार ने मंदी की ओर धकेला  ? अब क्या कारण है कि बाजार के मन्दी से बाहर निकलने की पूरी संभावना है ? सरकार के द्वारा समय पर उठाये गये कारगर कदम से आर्थिक मंदी को ब्रेक कैसे लगा ? अब निफ्टी फिर से 12000 की ओर कदम बढ़ाएगी ?

ये है इन सबका जवाब………  इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज { IF&SL }

 

परिचय

              आईएल एंड एफएस (इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज) एक सरकारी क्षेत्र की कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1987 में हुई है | यह एक नॉन बैंकिंग फाइनेंस श्रेणी की कंपनी है | IF&SL की अनेक सहायक कंपनियां भी है | कम्पनी द्वारा Infrastructure Services, Financial Services एवं Technology Services आदि सेवाये प्रदान की जाती है | कंपनी गारंटी के आधार पर बैंकों से लोन लेती है |

कम्पनी के हिस्सेदारी –

LIC 25.34%
ORIX COP. JAPAN 23.54%
ABU DHABI INVESTMENT AUTHO. 12.56%
HDFC  9.02%
CENTRAL BANK OF INDIA  7.67%
STATE BANK OF INDIA  6.47%

 

वर्तमान दशा

वर्तमान में कम्पनी तरलता की कमी से जूझ रही है। हाल ही में कम्पनी और सहायक कम्पनियों के करीब 91,000 करोड़ पेमेंट लगातार डिफॉल्ट किए हैं और छोटी अवधि का कर्ज चुकाने में भी नाकाम रही है। कम्पनी  ने 12-27 सितंबर तक 7 पेमेंट डिफॉल्ट किए हैं और 12-26 सितंबर के बीच 5 बैंकों के लोन नहीं चुकाए। कंपनी के वित्तीय संकट फंसने के बाद कम्पनी और सरकार पर कई बड़े सवाल खड़े हुये है, जैसे :-

  • क्या कम्पनी 91,000 करोड़ रुपये का डिफॉल्ट कर देगी ?
  • क्या कम्पनी पर आया यह खतरा प्रबन्धकीय या प्रणालीगत जोखिम का खतरा है ?
  • कम्पनी का उच्च प्रबन्धक वर्ग संकट के वक्त अपने पदों से त्याग कर क्यों भाग गया ?
  • कम्पनी के दिग्गज जैसे, एलआईसी, एसबीआई, एचडीएफसी क्या कर रहे थे ?
  • क्या इस कम्पनी को भी IDBI BANK की तरह एलआईसी के जरिये उभारा जाएगा ?
  • क्या इस संकट पर भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार ने मामले पर देर से ध्यान दिया ?
  • क्या कम्पनी फिर से विश्वास प्राप्त कर सकेगी |
  • जिन अधिकारियों के कारण कंपनी आज इस हालत में पहुंची है, उन पर कार्रवाई होगी ?

 

दशा और प्रभाव

 

               अभी तक कंपनी को विभिन्न रेटिंग एजेंसियों से अति सुरक्षित  यानि  ‘एए प्लस’ की रेटिंग हासिल थी | मगर कंपनी 90,000 करोड़ लोन डिफाल्ट होने से महज 8 – 10 दिनों के भीतर इसकी रेटिंग को ‘एए प्लस’ से घटाकर जंक स्टेटस यानि कूड़ा करकट हो गयी | शेयर बाजार में मंदी का भूचाल आ गया | गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों {NBFC},इन्फ्रा,हाउसिंग फायनेंस कम्पनियों के शेयरों के अगवानी में अन्य सभी शेयर धड़ाम-बड़ाम गिरने लगे | बाजार में मिडकैप और स्मालकैप कम्पनियों के शेयरो की जमकर पिटाई हुई | बाजार की इस मंदी से निवेशको के मन में 2008 की “लीमन” मंदी का भय समाने लगा जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया | प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड एजेन्सियों और म्युचुअल फंड कंपनियों को जिन्होंने इस कम्पनी में निवेश किया है, निवेश खतरे में नजर आने लगा | कम्पनी का अधिक पैसा सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में लगा है,कम्पनी के  इस हालत से तमाम प्रोजेक्ट अधर में लटकने का खतरा होने का अंदेशा होने लगा | देश में आर्थिक मंदी का वातावरण हो गया |

दिशायें

  • NCLT में आवेदन – एक्ट की धारा 241 और 242 के अंतर्गत सरकार के सोमवार को NCLT में पिटीशन दायर की गयी | सरकार ने दलील यह तर्क दिया कि कम्पनी अपनी देनदारियां चुकाने में नाकाम रही है। इसके साथ कई रेटिंग एजेंसियों ने कम्पनी की रेटिंग घटा दी है। इससे पहले सरकार ने NCLT में एक अर्जी देकर ILFC के बोर्ड को भंग करने का आग्रह किया था। सरकार ने कहा था कि मौजूदा बोर्ड को जारी रखने से नुकसान हो सकता है जो आम लोगों के हित में नहीं होगा।
  • NCLT ने सरकार की दलील को स्वीकार करते हुये कम्पनी के सभी बोर्ड सदस्यों को हटाने के आदेश दिए | साथ ही यह भी आदेश दिए कि हटाये गये सदस्य कम्पनी की ओर से कही भी किसी भी मामले में कम्पनी को REPRESENT नही कर सकेंगे |
  • NCLT ने नये बोर्ड का गठन करके 8 अक्तूबर को पहली मीटिंग करने और 31 अक्तूबर से पहले ILFS को उबारने की योजना के लिए रोड मेप बनाकर रिपोर्ट करने को कहा |
  • कंपनी को 15 अक्टूबर तक केंद्र की ओर से उठाए सवालों का जवाब देने का निर्देश भी दिया।
  • सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक उदय कोटक की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय बोर्ड का भी गठन कर दिया है।
श्री उदय कोटक अध्यक्ष कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक
श्री विनीत नैय्यर टेक महिंद्रा के प्रमुख
श्री जी एन वाजपेयी पूर्व सेबी चेयरमैन
श्री जी सी चतुर्वेदी आईसीआईसीआई बैंक के नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन
श्री मालिनी शंकर पूर्व आईएएस अधिकारी
श्री नंद किशोर पूर्व आईएएस अधिकारी

 

वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुये कहा है कि देश के गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में तरलता  की समस्या खत्म करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। साथ ही सरकार के इस कदम से वित्तीय बाजार में विश्वास बढ़ेगा और उम्मीद है कि वित्तीय संस्थान गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मदद देंगे।

सरकार द्वारा उठए गये इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था में मंदी का खतरा टलता फ़िलहाल दिखाई दे रहा है | इस कदम से ILFS पटरीपर आ जाएगी जिससे कई NBFC और मुचुअल कम्पनियों को संजीवनी मिलेगी |  

शेयर बाजार में गिरावट का दौर थम जाने की पूरी संभावना है परन्तु बाजार की नजर क्रूड के उबलने और रुपये की सेहत के साथ साथ ट्रेड वॉर पर भी रहेगी | RBI की मोनेटरी पोलिसी पर भी बाजार की नजर है |  बाजार में तेजी की प्रबल सम्भावनाये है |

              

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