नीरव मोदी-चोकसी से लेकर गीतांजलि-वक्रांगी और बैंको से निकल कर आये बड़ी राशि के डूबते बैंक ऋणों की मार का बाजार ने सामना किया | इस कठिन समय से उभरने के बाद बाजार ने नये उत्साह के साथ यात्रा करते हुये अगस्त सीरिज में नई ऊंचाईयों को छुने का रिकार्ड बनाया | बाजार और निवेशक, सभी खुश होकर चैन से अंगड़ाई ले ही रहे थे कि सितम्बर सीरिज में अचानक सभी खुशियाँ गायब होने लगी | बाजार में भूचाल आने के साथ-साथ बिकवाली का तूफान भी आ गया, और देखते ही देखते बाजार की सारी तेज़ी को उड़ाकर ले गया | चारो ओर मंदी के बादल बरसने लगे | मंदी का यह दौर पुरे माह जारी रहा | जल्दी ही हालातो पर काबू नही पाया गया तो 2008 में आयी विश्वव्यापी “लीमन” मंदी से भी ज्यादा हमारे देश के लिए “IL&FS” की मंदी खतरनाक होगी |

तालिका में प्रदर्शित आंकड़े शेयर बाजार की इस मंदी को स्पष्ट बया कर रहे है कि लगभग सभी सेक्टर,छोटे बड़े सभी शेयरों ने गिरावट का सामना किया है | इस माह SENSEX में 6.25%, NIFTY 7.50%, SMALL CAP और MID CAP में क्रमशः19.79%एवं13.88%की गिरावट के साथ 52 सप्ताह के न्यूनतम स्तर तक गिरे है | BANK NIFTY में भी 10.48% की गिरावट हुई |

Sector 52 WEEK HIGH AS ON 31.08.18 AS ON 28.09.18 DIFF.FROM 31.08.18
POINT %  (-)
SENSEX 38989.65 38645.07 36227.14 2418 6.25
NIFTY 11760.20 11680.50 10930.45 750 7.50
SMALL CAP 9656.35 7668.95 6150.95 1518 19.79
MID CAP 21840.85 19920.45 17154.35 2766 13.88
BANK NIFTY 28388.65 28061.75 25119.85 2942 10.48

 

इस जबरदस्त गिरावट के खलनायक

  • ट्रेडवार के तनाव बढ़ने की आशंकाओं के साथ क्रुड के दामो में बढ़ोतरी के चलते पिछले माह रुपए की विनिमय दर में तेज़ गिरावट दर्ज़ की गयी | वर्तमान में रुपए के मुकाबले प्रति डॉलर की कीमत रू.72.48 तक पहुंच गई है |
  • सेबी के विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए केवाईसी नियमों में संशोधन किये जाने के कारण विदेशी निवेशकों ने इस महीने में अब तक भारतीय पूंजी बाज़ारों से 2 अरब डॉलर की निकासी की है | यह निवेश पिछले कुछ महीनो में निवेशकों ने बाज़ार में निवेश किया था | इस निकासी का एक कारण ट्रेडवार और बढ़ते चालू खाते के घाटे की चिंता भी है |
  • शेयर बाजार की इस सीरिज में IL&FS को सबसे बड़ा खलनायक माना जा सकता है,जिसने बाजार के मूड को बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा की है | कम्पनी लगातार लिक्विडिटी की कमी से जूझ रही है। साथ ही छोटी अवधि का कर्ज चुकाने में भी नाकाम रही है। कंपनी 91,000 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के बड़े वित्तीय संकट में फंस गई है | IL&FS ने 12-27 सितंबर तक 7 पेमेंट डिफॉल्ट किए हैं और 12-26 सितंबर के बीच 5 बैंकों के लोन भी नहीं चुकाए। इस कम्पनी में एलआईसी, एसबीआई, एचडीएफसी जैसे दिग्गज प्रोमोटर है | कम्पनी की 29 सितंबर की बोर्ड बैठक है जिसमे पूंजी जुटाने पर विचार होने वाला है। इस मामले में संतोषजनक हल नही निकलने तक बाजार में आगे भी भारी मंदी की सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता है |
  • IL&FS जैसा खतरा अन्य NBFC कम्पनियों में भी होने की आशंका ने बाजार का मूड और ज्यादा बिगाड़ने में सहायता की | जिसके कारण हाउसिंग फायनेंस,NBFC,इन्फ्रा सेक्टर की कम्पनियों के शेयर धड़ाधड़ गिरने से बाजार में दहशत का माहोल बनता गया |
  • IL&FS के कारण DHFL का शेयर धरासायी हो गया | शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 690 रुपये था | 31.08.18 को रू.667.65 के स्तर से गिरकर 59% गिरकर 2795 रुपये पर आ गया है। कम्पनी के स्पष्टीकरण के बावजूद शेयर नही सम्भला |
  • यस बैंक के CEO राणा कपूर के कार्यकाल घटने के बाद शेयर में गिरावट देखी गई | यस बैंक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर रू.404 था, जबकि 31.08.18 को रू 343.50 से 46% गिरकर अब गिरकर रुपये 1865 पर आ गया है।
  • इंडियाबुल हाउसिंग फायनेंस का शेयर भी इस माह खलनायक रहा है | यह शेयर 31.08.18 के स्तर रू.1259.25 से 32% गिरकर रू.856.85 पर बन्द हुआ |
  • इन्फीबीम के शेयर ने भी एक दिन में 74% से अधिक धराशायी होने का रिकार्ड बनाया | यह शेयर 31.08.18 के स्तर रू.228.20 से रू.58.45 तक गिरकर बन्द हुआ |

 

आगे के बाजार में खलनायक शेयरों पर सबकी नजर रहेगी | साथ ही भारत के सबसे नये प्राइवेट बैंक के द्वारा मानकों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक ने बंधन बैंक के सीईओ और प्रबन्ध निदेशक की तनख्वाह {Salary} फ्रीज़ कर दी है,साथ ही नई बैंक शाखा खोलने से भी मना कर दिया है |बंधन बैंक के शेयर में भी हल-चल दिखेगी |

5 अक्तूबर को आने वाली मोनेटरी पालिसी,रुपये और क्रुड की चाल के साथ-साथ ट्रेडवार की खबरे भी बाजार को प्रभावित करेगी |

पिछला अनुभव यही बताता है कि अधिकांशत: अक्तूबर माह में बाजार का रुख पोजिटिव रहता है | बाजार एक दायरे में रहते हुये कारोबार करता नजर आ सकता है |

आईटी की दिग्गज कम्पनियों के साथ अन्य कम्पनियों के तीसरी तिमाही के आकड़े भी बाजार को दिशा देंगे |

सितम्बर माह के ऑटो सेक्टर के बिक्री के आकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे |

आईटी,फार्मा सेक्टर बहुत आकर्षक है | बाजार में संभलकर ट्रेड करने की सलाह है |

 

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