भारतीय रिजर्व बैंक की लाइसेंसिंग शर्तों के अनुसार, एक प्राइवेट बैंक को अपने संचालन {Operations} के तीन सालों के भीतर अपने प्रमोटर की शेयरहोल्डिंग 40% करनी होती है | 23 अगस्त को 3 साल पूरे करने वाले और इसी वर्ष मार्च में आईपीओ के जरिये पूंजी बाजार मे प्रवेश करने वाले, भारत के सबसे नये प्राइवेट बैंक के द्वारा इन मानकों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक ने बंधन बैंक के सीईओ और प्रबन्ध निदेशक चंद्रशेखर घोष की तनख्वाह {Salary} फ्रीज़ कर दी है,साथ ही नई बैंक शाखा खोलने से भी मना कर दिया है |

इसलिए बंधन बैंक अब भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के बिना कोई नई शाखा नहीं खोल पाएगा | भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम पर बंधन बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया है कि :-

 “आरबीआई ने हमसे कहा है, क्योंकि बैंक “नॉन ऑपरेटिव फाइनैंशियल होल्डिंग कंपनी” (एनओएफएचसी) की शेयरहोल्डिंग को कम करके 40%लाने में कामयाब नहीं हो सकी है | लाइसेंस में यह एक शर्त थी | इसके चलते नई ब्रांच खोलने की साधारण मंजूरी को रद्द किया जाता है | अब बैंक नई ब्रांच आरबीआई की मंजूरी के बाद ही खोल पाएगी | मौजूदा स्तर पर एमडी और सीईओ के पारिश्रमिक को भी फ्रीज़ कर दिया गया है |”

बंधन बैंक ने अपनी सफाई में बताया है कि,  बैंक लाइसेंस की शर्तों के अनुसार बैंक में नॉन ऑपरेटिव फाइनैंशियल होल्डिंग कंपनी की शेयरहोल्डिंग को 40% पर लाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है | बैंक आरबीआई से इस संबंध में संपर्क में रहेगा |

भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम के बाद सोमवार को बंधन बैंक के शेयर में हलचल देखने को मिल सकती है |

 

 

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