आप अपना सोच बदल दीजिए, आप की दुनिया बदल जाएगी।“ आप स्वयं अपने जीवन में आजमाकर देखिये क्योंकि धन से आज तक किसी को खुशी नहीं मिली और न ही मिलेगी, जितना अधिक व्यक्ति के पास धन होता है, वह उससे कहीं अधिक चाहता है। धन रिक्त स्थान को भरने के बजाय शून्यता को पैदा करता है।“ बेंजामिन फ्रेंकलिन

                    

एक दिन मेरे बेटे ने कहा,” बहुत दिन हो गये, मैने आपको सीटी बजाते नही सुना | पहले तो आप बजाते रहते थे |” सुनकर मैं केवल मुस्कराकर रह गया |  मन में विचार आया कि ये केवल मेरे बेटे का ही आंकलन नही है,मेरा एक मित्र भी जो एक बैंक में उच्च पद पर है, वह भी कह रहे थे कि,” पहले हम लोग जानते थे कि ख़ुशी और प्रसन्नता कैसे प्राप्त की जाती है | लगता है, वर्तमान की इस भाग-दोड़ वाली जिंदगी में हर कोई खुश रहना चाहता है, पर रह नहीं पाता है। खुशी मन की एक अवस्था का नाम है। क्या हम,नोकरी-व्यवसाय और घरेलू कामो के दबाव कई वजहों से खुश रहने के गुर ही भूल गये  है ?” बच्चों जैसी खुशी अब दुर्लभ प्रतीत होती जा रही है। खेलते बच्चों का चिल्ला कर खुशी का इजहार करना अब बहुत कम देखने को मिलता है | पता नही आजकल हम चाह कर भी अधिक खेल और खुशी का इजहार क्यों नहीं कर पाते हैं,जबकि खुशी ही जीवन का अर्थ और उद्देश्य है,और मानव अस्तित्व का लक्ष्य और मनोरथ भी | अगर वास्तव में वर्तमान इंसान की यही दशा है तो यह विचारनीय है कि सीटी बजाकर ख़ुशी जाहिर करने वाली मानसिक अवस्था कैसे उत्पन्न की जा सकती है,और इंसान स्वाभाविक और अनायास आनन्द कैसे प्राप्त कर सकता है,जो ह्रदय की गहराहियो में उत्पन्न होता हो |

हमे स्वस्थ रहना :- जीवन में आनंद लेने का सीधा एवं गहरा सम्बन्ध हमारे स्वास्थ्य एवं शारीरिक अवस्था से है | यदि हमारे पास स्वास्थ्य है तो संभवतः हम प्रसन्न होंगे, और यदि हमारे पास स्वास्थ्य और प्रसन्नता दोनों हैं, तो हमारे पास हमारी आवश्यकता के अनुसार समस्त सम्पदा होगी फिर चाहे हम इसे न भी चाहते हों। आनंद की स्थिति उत्पन्न होने के लिए उचित योग,प्राणायाम एवं व्यायाम के साथ साथ उचित आराम और विश्राम, आवश्यक है | क्योंकि योग,प्राणायाम एवं व्यायाम से मष्तिक में स्थित शरीर के अंगो को नियंत्रित करने वाले केन्द्रों का व्यायाम हो जाता है और खून भावनागत केन्द्रों से हट जाता है,जिससे हमारे मष्तिक में सकारात्मक और रचनात्मक विचारो को ग्रहण करने की क्षमता प्रभावशाली रूप से बढ़ जाती है | जीवन में ख़ुशी प्राप्त करने का पहला कदम स्वस्थ शारीरिक अवस्था का ठीक होना तथा दूसरा कदम सकारात्मक और रचनात्मक सोच है | सही कहा गया है कि “आप अपना सोच बदल दीजिए, आप की दुनिया बदल जाएगी।“ आप स्वयं अपने जीवन में आजमाकर देखिये क्योंकि धन से आज तक किसी को खुशी नहीं मिली और न ही मिलेगी, जितना अधिक व्यक्ति के पास धन होता है, वह उससे कहीं अधिक चाहता है। धन रिक्त स्थान को भरने के बजाय शून्यता को पैदा करता है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन

अपनाये सकारात्मक और रचनात्मक विचार :- सकारात्मक और रचनात्मक विचार करके हम हमेशा खुश रहना सीख सकते है क्योंकि जिसे प्रसन्न रहने की आशा होती है वह प्रसन्न रहना सीख ही लेता है | एक प्रसिद्ध विचारक ग्रोचो मार्क्स कहते है “हर सुबह जब मैं अपनी आंखे खोलता हूं तो अपने आप से कहता हूं कि आज मुझमें स्वयं को खुश या उदास रखने का सामर्थ्य है न कि घटनाओं में, मैं इस बात को चुन सकता हूं कि यह क्या होगी, कल तो जा चुका है, कल अभी आया नहीं है, मेरे पास केवल एक दिन है, आज तथा मैं दिन भर प्रसन्न रहूंगा।“ अथार्त प्रतिदिन हम प्रात:काल हम यह आशा लेकर उठे कि आज कोई प्रसन्नता देने वाली बात जरुर होगी | आप यकीन मानिए बहुत कम ऐसा होगा की आपकी आशा गलत हो | अगर हम आनंद की प्रत्याशा रखेंगे तो हमे आनंद जरुर प्राप्त होगा और वह व्यक्ति कभी खुश नही हो सकता जो आनंद की प्रत्याशा नही रखता है | आशावादी व्यक्ति हर आपदा में एक अवसर देखता है और निराशावादी व्यक्ति हर अवसर में एक आपदा देखता है। निराशावादी व्यक्ति का हृदय घृणा या स्वार्थ युक्त होने से उसके जीवन में प्रसन्नता के प्रकाश की किरणें नही फुट सकती है |

अपनेआप पर विश्वास रखिये :- हर व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते-जाते रहते हैं । इनसे निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि अपना मनोबल मजबूत कर उससे मुकाबला करने का प्रयास करना  लेने चाहिए। हमारी सभी अंगुलिया लम्बाई मे बराबर नही होती है, परन्तु जब वे मुड़ती है तो बराबर दिखती है | इसी प्रकार यदि हम किन्ही परिस्थितियों में थोड़ा सा झुक जाते है या तालमेल बिठा लेते है तो जिन्दगी बहुत ही आसान और आनन्दित हो जाती है | हमे यह समझना चाहिये कि सुख़ और दुःख हमारे पारिवारिक सदस्य नही होकर सिर्फ मेहमान है, जो बारी,बारी से आते है कुछ दिन ठहर कर चले जाते है | सच तो यह है कि इनके आने-जाने से ही इंसान जिन्दगी में कुछ ना कुछ सीखता है | इस संसार में सबसे सुखी वही व्‍यक्ति है जो अपने घर में शांति पाता है।  अपने निजी जीवन को कभी भी चेहरे से प्रदर्शित नही करना भी खुश रहने की एक कला है | हम चार्ली चैपलिन के जीवन से प्रेरणा ले सकते है, उन्होंने अपने निजी जीवन को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया तथा अपनी कला के माध्‍यम से ‍ब्रिटेन ही नहीं, सारी दुनिया को हंसाया | प्रसन्न रहने के लिए पुरानी गलतियों,भूलो और दुखो को भी भूल जाना आवश्यक है

 

हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहिये :- हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहना भी ख़ुशी पाने का तरीका है । उदास व गमगीन चेहरा कोई भी पसंद नही करता है जबकि  हंसमुख व्यक्ति के आसपास सदा सभी लोग मंडराते रहते हैं | दुखी या निराश व्यक्ति से लगभग सभी लोग किनारा कर लेते हैं। प्रसिद्ध दार्शनिक एल्बर्ट हावेर्ड की बात माने जिनके अनुसार “ सवेरे 10 बजे तक मग्न और प्रसन्नचित्त रहिए,फिर दिन का शेष भाग आप ही अपना ध्यान रख लेगा |” इसी प्रकार एक अन्य दार्शनिक हेनरी हार्वड थोरो प्रात:काल सबसे पहले स्वयं को कोई हर्ष का समाचार सुनाया करता था,इसका कोई न कोई पहलू निकाल ही लिया करता था | आप का इस संसार में जन्म लेना ही कितने सौभाग्य की बात है | यदि आप जन्म नही लेते प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों के आनंद नही ले पाते, हरियाली,बादल,बरसात,नदी,तालाब,सागर,जंगल के सुरम्य द्र्श्यो का आनंद नही ले पाते | आसमां में सूरज और चांदनी रात में तारो की छटाओं का नजारा, मन को लुभाने वाले फूलो की सुगंध,सखा एवं बंधुओ व परिवार जनों के नेत्रों में प्रेम की चमक नही देख पाते | अत: इन सबके के लिये सबसे पहले ईश्वर को धन्यवाद उपरांत ही दिन का प्रारंभ करना चहिये |

परोपकारी बनिये :- परोपकार यानि दुसरो को कुछ ना कुछ देना या सहायता करना भी आनंद प्राप्ति का एक तरीका है | यह सहायता आर्थिक रूप में,ज्ञान या उपदेश के रूप में, व्यक्तिगत उपस्थिती के रूप में या अन्य किसी भी रूप में हो सकती है | अगर कोई जरूरत पर ही आपको याद करता है तो उसका अन्य अर्थ मत निकालिये, क्योंकि हो सकता है आप जरूरतमंद के लिए रोशनी की किरण हो जो उसे अंधेरे में दिखाई दी हो | याद रखे आप कितने ही बड़े उत्साही,मेहनती,सकारात्मक विचारधारा युक्त और महत्वाकांक्षी हो,अपने काम में ही व्यस्त रहते हो तथा एक पल भी अपने आस-पास वालो की और ध्यान नही देते हो तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नही है कि आप अपने जीवन में भी कभी प्रसन्नता और आनंद प्राप्त नही कर सकते | धीरे धीरे आपके मन में खिचाव,मानसिक तनाव और व्याकुलता के लक्षण पनपने लगेगें | करोड़ो की इस भीड़ और अपनों में भी, अपने आप को अकेला महसूस करने लगेंगे | क्योंकि प्रत्येक बात आपके भीतर प्रविष्ट होती है पर कोई बात बाहर ही नही आती है | आप अपनों के इस भीड़ में उस लुप्त सागर की तरह बन जाओगे जिसमे जल प्रवेश के मार्ग तो है पर जल निकासी के नही |

यदि हम प्रसन्न रहना चाहते है,और चाहते है कि सड़क पर ख़ुशी से टहलते हुये मन सीटी बजाने को करे तो अपने आप पर भरोसा रखिये,अपने आप से निकलकर बाहर आये,प्रत्येक व्यक्ति के प्रति अच्छा भाव मन में रखिये,अपनी सोच को सकारात्मक एवं क्रियाशील रखिये,दुसरो की सहायता कीजिये | जीवन में प्रसन्नता अपने आप सुगन्धित हवा की तरह बहने लगेगी |

2 Thoughts to “जीवन में आनन्द प्राप्ति के साधन”

  1. Sanjay Sharma

    एकदम प्रासंगिक लेख है।

  2. H N DAGA

    Really Truth of life….

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